हेलो दोस्तों,
मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी पहली पोस्ट पसंद आई होगी! तो लीजिये मैं आज फिर हाज़िर हूँ अपने ख्यालात लेकर! आज सुबह जब मैं उठी तो बाहर बहुत सुहाना मौसम था, हल्की बरसात में मिट्टी की भीनी- भीनी खुशबु मन को महका रही थी! मन तो एकदम खुश हो गया, और जी चाहा अगर हल्का सा म्यूजिक साथ हो तो क्या बात है! एकदम सोने पे सुहागा वाली बात हो जाएगी ;) बस फिर क्या था हम म्यूजिक के दीवानो को तो संगीत सुनने का बहाना चाहिए होता है, फिर चाहे वह सुबह हो, शाम या फिर भरी दोपहर ! तो जी मैने एकदम लाइट म्यूजिक वाले सांग्स लगाये और अपने हस्बैंड के साथ बैठ कर चाय की चुस्किया लेते हुए उस संगीत का आनंद उठाया और अपने दिन की एक खूबसूरत शुरुआत की! और जब दिन की शुरुआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा ही जाता है! मौसम भी हसीं रहा और हमने क्या शानदार और जानदार संगीत का लुतफ़ उठाया! भई बरसात में म्यूजिक सुनने का अपना ही मज़ा है, मेरे हस्बैंड अचानक यह बोल पड़े, और बात सही भी है ! क्यों आप लोग मानते हो न इस बात को?
संगीत, अगर अच्छे संगीत की बात की जाये तो वह तो पहले के ज़माने का ही अच्छा होता था, आजकल तो संगीत के नाम पर बस मौज मस्ती है जिसे दो दिन में सब भुला देते है! वोह रफ़ी साहिब, किशोर दा, लता दीदी, आशा जी उनको तो बस सुनने का अपना ही मज़ा है! आज भी उनके गाने जब चल जाये तो लोग खो जाते है उनकी आवाज़ में, उस संगीत में जो बर्मन साहिब देते थे! मेरे हस्बैंड भी म्यूजिक का शौंक रखते है और इसलिए उस दिन हमारा म्यूजिकल ही रहा!
अब आप यह मत सोचने लगिएगा की यह तो एकदम पुराने गाने की ही शौक़ीन है, नहीं नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है! मैं आज कल के संगीत के खिलाफ नहीं हूँ, और सुनती भी हूँ आज कल का म्यूजिक, लेकिन जब कभी भी म्यूजिक सुनने की बात हो तो मेरी पहली पसंद पुराने गाने ही होते है! नया संगीत भी अच्छा लगता है कभी-कभी, खास कर के जब मौज मस्ती करने का मन हो जाये! आज कल के सांग्स काफी अच्छे है मस्ती करने के लिए :) !
अब ऐसा भी कुछ नहीं है, आज भी कुछ सिंगर्स और म्यूजिक डायरेक्टर्स है जो बहुत अच्छा संगीत देते है जिन्हे सुन कर उतना ही मज़ा आता है जितने उन सब पुराने लोगो को सुनकर जैसे की सोनू निगम, बस एक ही नाम याद आया ;) ! आज का म्यूजिक भी दिल को छू जाता है लेकिन कम ही ऐसा होता है ! एक बहुत प्रख्यात कहावत नया नौ दिन , पुराण सौ दिन मुझे इस समय याद आ रही है जो इस कथन को पूरा कर रही है!
खैर इस तरह हमने अपना सारा दिन संगीत को सुनते और उसमे झूमते, गाते बिताया! पूरा वातावर्ण ही म्यूजिकल हो रखा था और इसलिए हम लोगो ने आज के दिन को नाम भी दिया म्यूजिकल डे ! और क्यों नहीं जब सारा दिन इतना बढ़िया म्यूजिक सुना हो तो म्यूजिकल डे ही हुआ न वह!
मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी पहली पोस्ट पसंद आई होगी! तो लीजिये मैं आज फिर हाज़िर हूँ अपने ख्यालात लेकर! आज सुबह जब मैं उठी तो बाहर बहुत सुहाना मौसम था, हल्की बरसात में मिट्टी की भीनी- भीनी खुशबु मन को महका रही थी! मन तो एकदम खुश हो गया, और जी चाहा अगर हल्का सा म्यूजिक साथ हो तो क्या बात है! एकदम सोने पे सुहागा वाली बात हो जाएगी ;) बस फिर क्या था हम म्यूजिक के दीवानो को तो संगीत सुनने का बहाना चाहिए होता है, फिर चाहे वह सुबह हो, शाम या फिर भरी दोपहर ! तो जी मैने एकदम लाइट म्यूजिक वाले सांग्स लगाये और अपने हस्बैंड के साथ बैठ कर चाय की चुस्किया लेते हुए उस संगीत का आनंद उठाया और अपने दिन की एक खूबसूरत शुरुआत की! और जब दिन की शुरुआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा ही जाता है! मौसम भी हसीं रहा और हमने क्या शानदार और जानदार संगीत का लुतफ़ उठाया! भई बरसात में म्यूजिक सुनने का अपना ही मज़ा है, मेरे हस्बैंड अचानक यह बोल पड़े, और बात सही भी है ! क्यों आप लोग मानते हो न इस बात को?
संगीत, अगर अच्छे संगीत की बात की जाये तो वह तो पहले के ज़माने का ही अच्छा होता था, आजकल तो संगीत के नाम पर बस मौज मस्ती है जिसे दो दिन में सब भुला देते है! वोह रफ़ी साहिब, किशोर दा, लता दीदी, आशा जी उनको तो बस सुनने का अपना ही मज़ा है! आज भी उनके गाने जब चल जाये तो लोग खो जाते है उनकी आवाज़ में, उस संगीत में जो बर्मन साहिब देते थे! मेरे हस्बैंड भी म्यूजिक का शौंक रखते है और इसलिए उस दिन हमारा म्यूजिकल ही रहा!
अब आप यह मत सोचने लगिएगा की यह तो एकदम पुराने गाने की ही शौक़ीन है, नहीं नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है! मैं आज कल के संगीत के खिलाफ नहीं हूँ, और सुनती भी हूँ आज कल का म्यूजिक, लेकिन जब कभी भी म्यूजिक सुनने की बात हो तो मेरी पहली पसंद पुराने गाने ही होते है! नया संगीत भी अच्छा लगता है कभी-कभी, खास कर के जब मौज मस्ती करने का मन हो जाये! आज कल के सांग्स काफी अच्छे है मस्ती करने के लिए :) !
अब ऐसा भी कुछ नहीं है, आज भी कुछ सिंगर्स और म्यूजिक डायरेक्टर्स है जो बहुत अच्छा संगीत देते है जिन्हे सुन कर उतना ही मज़ा आता है जितने उन सब पुराने लोगो को सुनकर जैसे की सोनू निगम, बस एक ही नाम याद आया ;) ! आज का म्यूजिक भी दिल को छू जाता है लेकिन कम ही ऐसा होता है ! एक बहुत प्रख्यात कहावत नया नौ दिन , पुराण सौ दिन मुझे इस समय याद आ रही है जो इस कथन को पूरा कर रही है!
खैर इस तरह हमने अपना सारा दिन संगीत को सुनते और उसमे झूमते, गाते बिताया! पूरा वातावर्ण ही म्यूजिकल हो रखा था और इसलिए हम लोगो ने आज के दिन को नाम भी दिया म्यूजिकल डे ! और क्यों नहीं जब सारा दिन इतना बढ़िया म्यूजिक सुना हो तो म्यूजिकल डे ही हुआ न वह!
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