हेलो फ्रेंड्स,
मैं आज फिर हाज़िर हूँ अपनी एक नयी पोस्ट के साथ जिसमे आज मैं ग़ज़लों के बारे में कुछ बात करुँगी! ग़ज़ल(Ghazal) का जब भी नाम आता है तो जगजीत साहिब को तो याद किया ही जाता है, क्या कमाल के ग़ज़ल गायक थे वह, और उनकी ग़ज़लें वाह वाह एकदम नायाब ! क्या सुकून मिलता था उनकी ग़ज़लें सुन कर, मन को शांति और एकदम दिल को छू जाने वाली होती थी उनकी ग़ज़लें! फिर चाहे आप "यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो" की बात कर ले या फिर "तुम इतना जो मुस्करा रहे हो" दोनों अपने तर्ज़ की ग़ज़लें है पर सुन कर क्या मज़ा आता है! ग़ज़ल(Ghazal) किसी की भी हो, कभी आप अकेले में बैठ कर इन ग़ज़लों को सुने तो कभी-कभी ऐसा ही लगता है जैसे आपके दिल की ज़बान बोल रही हो!
मन की हालत अगर कोई सही शब्दों में बयान कर सकता है तो वह यह ग़ज़लें है., मुझे तो कभी-कभी ऐसा ही लगता है जैसे यह जान लेती है की हमारे दिल में क्या चल रहा है और शब्दों में बोल पड़ती है! कभी तो हम इन्हे सुन कर झूम उठते है और कभी ऐसे की आँखें भर आती है, लेकिन फिर भी ग़ज़ल(Ghazal) सुनने के शौक़ीन इन्हे बड़े चाव से सुनते है!
आखिर ग़ज़ल(Ghazal) है क्या? एक शायर द्वारा लिखे गए शेरो का समूह जिनकी गिनती ५-२५ तक के हो सकती है! क्या इतनी परिभाषा में ग़ज़ल(Ghazal) को ब्यान किया जा सकता है? शायद हम आम लोगो के लिए ग़ज़ल(Ghazal) की यही परिभाषा हो, परन्तु ग़ज़ल लिखने वाले इसके अलग ही मायने निकलते है, उनके लिए ग़ज़ल(Ghazal) सिर्फ चन शेर पढ़ देना नहीं है, अपितु एक विद्या है जिसे वह पूरी जी-जान से पड़ते है और अपनी तमाम ज़िन्दग़ी इस पर न्योछावर कर देते है! ग़ज़ल(Ghazal) जितनी सुनाने में मज़ा आता है इसे लिखना उतना ही मेहनत का काम है! हमें फक्र है की हमारे देश में ऐसा महान कलाकार हुए हैं जिन्होंने ग़ज़ल(Ghazal) को एक अलग मुकाम तक पहुँचाया है औ पूरे संसार में अपना नाम कमाया है! हिंदी के ऐसे अनेक रचनाकार हुए है जिन्होंने ने इस विधा को अपनाया है जिनमें निराला, शमशेर, बलबीर सिंह, भवानी शंकर आदि प्रमुख हैं। परन्तु इस क्षेत्र में सर्वाधिक प्रसिद्धि प्रापत करने वाले थे दुष्यंत कुमार!
कुछ प्रख्यात ग़ज़ल गायक जिन्हे मेँने सुना है वह हैं :
जगजीत सिंह
गुलाम अली
मेहंदी हसन
पंकज उधास
हरिहरन
मैं आज फिर हाज़िर हूँ अपनी एक नयी पोस्ट के साथ जिसमे आज मैं ग़ज़लों के बारे में कुछ बात करुँगी! ग़ज़ल(Ghazal) का जब भी नाम आता है तो जगजीत साहिब को तो याद किया ही जाता है, क्या कमाल के ग़ज़ल गायक थे वह, और उनकी ग़ज़लें वाह वाह एकदम नायाब ! क्या सुकून मिलता था उनकी ग़ज़लें सुन कर, मन को शांति और एकदम दिल को छू जाने वाली होती थी उनकी ग़ज़लें! फिर चाहे आप "यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो" की बात कर ले या फिर "तुम इतना जो मुस्करा रहे हो" दोनों अपने तर्ज़ की ग़ज़लें है पर सुन कर क्या मज़ा आता है! ग़ज़ल(Ghazal) किसी की भी हो, कभी आप अकेले में बैठ कर इन ग़ज़लों को सुने तो कभी-कभी ऐसा ही लगता है जैसे आपके दिल की ज़बान बोल रही हो!
मन की हालत अगर कोई सही शब्दों में बयान कर सकता है तो वह यह ग़ज़लें है., मुझे तो कभी-कभी ऐसा ही लगता है जैसे यह जान लेती है की हमारे दिल में क्या चल रहा है और शब्दों में बोल पड़ती है! कभी तो हम इन्हे सुन कर झूम उठते है और कभी ऐसे की आँखें भर आती है, लेकिन फिर भी ग़ज़ल(Ghazal) सुनने के शौक़ीन इन्हे बड़े चाव से सुनते है!
आखिर ग़ज़ल(Ghazal) है क्या? एक शायर द्वारा लिखे गए शेरो का समूह जिनकी गिनती ५-२५ तक के हो सकती है! क्या इतनी परिभाषा में ग़ज़ल(Ghazal) को ब्यान किया जा सकता है? शायद हम आम लोगो के लिए ग़ज़ल(Ghazal) की यही परिभाषा हो, परन्तु ग़ज़ल लिखने वाले इसके अलग ही मायने निकलते है, उनके लिए ग़ज़ल(Ghazal) सिर्फ चन शेर पढ़ देना नहीं है, अपितु एक विद्या है जिसे वह पूरी जी-जान से पड़ते है और अपनी तमाम ज़िन्दग़ी इस पर न्योछावर कर देते है! ग़ज़ल(Ghazal) जितनी सुनाने में मज़ा आता है इसे लिखना उतना ही मेहनत का काम है! हमें फक्र है की हमारे देश में ऐसा महान कलाकार हुए हैं जिन्होंने ग़ज़ल(Ghazal) को एक अलग मुकाम तक पहुँचाया है औ पूरे संसार में अपना नाम कमाया है! हिंदी के ऐसे अनेक रचनाकार हुए है जिन्होंने ने इस विधा को अपनाया है जिनमें निराला, शमशेर, बलबीर सिंह, भवानी शंकर आदि प्रमुख हैं। परन्तु इस क्षेत्र में सर्वाधिक प्रसिद्धि प्रापत करने वाले थे दुष्यंत कुमार!
कुछ प्रख्यात ग़ज़ल गायक जिन्हे मेँने सुना है वह हैं :
जगजीत सिंह
गुलाम अली
मेहंदी हसन
पंकज उधास
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